हेलो दोस्तों । थॉट्स फॉर ग्रोथ ब्लॉग में आपका स्वागत है । आज हम आपके लिए लेकर आए हैं “Dr Joseph Murphy” की लिखी किताब धन को आकर्षित कैसे करें “ How to attract Money” का हिंदी बुक समरी । Dr Joseph Murphy नव विचार आंदोलन के प्रवर्तक थे । उन्होंने 30 से भी ज्यादा पुस्तकें लिखी है ।Dr Joseph Murphy “द पावर ऑफ योर सबकॉन्शियस माइंड” जैसे बेस्टसेलर पुस्तकों के लेखक रहे हैं ।
इस किताब में कुल 2 अध्याय हैं जिसमें पहला अध्याय है अमीर बनना आपका अधिकार है, और दूसरा अध्याय है अमीरी की राह ।
तो चलिए शुरू करते हैं Dr Joseph Murphy की लिखी किताब धन को आकर्षित कैसे करें “How to attract Money” का कंपलीट हिंदी बुक समरी ।
अध्याय एक : अमीर बनना आपका अधिकार है!
लेखक कहते हैं कि गरीबी में कोई भी अच्छाई नहीं है । यह एक मानसिक रोग है, जिसका इस पृथ्वी से जड़ समेत विनाश कर देना चाहिए । हम यहां विकास करने आए हैं और खुद को प्रकट करने आए हैं: आध्यात्मिक दृष्टि से , मानसिक दृष्टि से और भौतिक दृष्टि से । हमारे पास इन सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास और अभिव्यक्ति करने का पूरा अधिकार है जिसे कोई भी हमसे छीन नहीं सकता है ।
लेखक कहते हैं कि जब हम असीम दौलत का आनंद ले सकते हैं तो फिर सीमित पैसों में क्यों संतुष्ट रहें?
ईश्वर नहीं चाहते है कि हम किसी गरीबी में रहे या भूखे रहें । ईश्वर चाहते हैं कि हम खुश , समृद्ध और सफल हो ।
हम मनुष्य यहां सफल होने और सारी मुश्किलों को जीतने के लिए पैदा हुए हैं । हम अपने समस्त शक्तियों को विकसित करने के लिए पैदा हुए हैं । अगर हमारे जीवन में आर्थिक अभाव है तो हमें इस बारे में जरूर कुछ करना चाहिए ।
धन संबंधी सभी अंधविश्वासी मान्यताओं से तुरंत मुक्ति पाना चाहिए । कभी भी पैसे को बुरा या गंदा नहीं मानना चाहिए । अगर हम ऐसा करते हैं तो पैसे के पंख लग जाएंगे और यह हमसे दूर चला जाएगा ।
क्युकी जिस चीज की हम निंदा करते हैं उसे हम खो देते हैं ।
प्रकृति की कोई भी शक्ति या तत्व बुरा नहीं होता है । यह तो हमारे इस्तेमाल पर निर्भर करता है कि हम उससे अपना लाभ पहुंचाते हैं या अपना नुकसान करते हैं ।
पैसे का प्रेम अगर बाकी सारी चीजों से प्रबल हो जाएगा तो आप एक तरफा और असंतुलित हो जाएंगे । आप संसार में अपनी शक्ति या सत्ता का समझदारी से इस्तेमाल करने आए हैं ।
पैसे को एकमात्र अपना लक्ष्य बनाना एक गलत चुनाव है । हम सोचते हैं कि हमें सिर्फ पैसा चाहिए । लेकिन अपनी तमाम कोशिशों के बाद हमें यह पता चलता है कि हमें जो चीज चाहिए थी वह थी मानसिक शांति और समृद्धि ।
दौलत चेतना की अवस्था है । यह दैवी आपूर्ति के सतत प्रवाह के प्रति अनुकूलित मस्तिष्क का परिणाम है ।
जो मनुष्य अवचेतन मन की कार्यप्रणाली जानता है वह कभी आर्थिक स्थिति , शेयर बाजार की दहशत ,मुद्रा के अवमूल्यन या मुद्रास्फीति की चिंता नहीं करता है । क्योंकि उसका वास ईश्वर की सतत आपूर्ति की चेतना में है । ऐसे मनुष्य को हमेशा एक विराट उपस्थिति द्वारा आपूर्ति दी जाएगी और उसकी देखभाल की जाएगी ।
दौलत एक मानसिक अवस्था है । आगे बताए गए छोटे वाक्य को दिन में तीन चार बार खुद से धीरे-धीरे कहें खासतौर पर सोने जाने से पहले यह वाक्य है:
पैसा मेरे जीवन में हमेशा खुलकर प्रवाहित हो रहा है और मेरे पास हमेशा दैवी समृद्धि है !
आप ऐसा नियमित और सुनियोजित तरीके से करते हैं तो दौलत का विचार आपके ज्यादा गहरे यानी अवचेतन मन तक पहुंच जाएगा और आप दौलत की चेतना विकसित कर लेंगे ।
अविचारित मशीनी दोहराव से दौलत की चेतना बनने में सफलता नहीं मिलती है । आप जो भी कह रहे हैं उसकी सच्चाई महसूस करिए । आप जानते हैं कि आप क्या कह रहे हैं और क्यों कह रहे हैं । आप जानते हैं कि आप जिसे चेतन रूप से सच मानते हैं आपका ज्यादा गहरा मन उस पर प्रतिक्रिया करेगा ।
जो लोग आर्थिक मुश्किलों में फंसे हुए होते हैं उन्हें शुरुआत में इस तरह के कथनों से परिणाम नहीं मिलता है जैसे मैं दौलतमंद हूं , मैं समृद्ध हूं , मैं सफल हूं । उल्टे ऐसे कथनों से हालात बदतर भी हो सकते हैं । इसका कारण यह है कि अब चेतन मन दो विचारों में से ज्यादा प्रबल विचार मनोदशा या भावना को ही स्वीकार करता है ।
जब वह कहते हैं मैं दौलतमंद हूं तो उनके भीतर से आवाज आती है नहीं तुम दौलतमंद नहीं हो । तुम तो कंगाल हो ,तब आपकी भावना ज्यादा प्रबल है इसलिए हर कथन अभाव की मनोदशा को जागृत करता है और इस वजह से उनका अभाव बढ़ जाता है ।
इससे उबरने के लिए शुरुआत में लोगों को ऐसी बात कहनी चाहिए जो उनके चेतन और अवचेतन मन दोनों को स्वीकार हो । तब कोई विरोध नहीं रहेगा । हमारा अवचेतन मन हमारी मान्यताओं , भावनाओं , विश्वासों को स्वीकार करता है या उसे स्वीकार करता है जिसे हम चेतन रूप से सच मानते हैं ।
एक आदमी यह कह कर अपने अवचेतन मन का सहयोग हासिल कर सकता है:
मैं हर दिन समृद्ध हो रहा हूं । हर दिन मेरी दौलत और बुद्धिमानी बढ़ रही है । हर दिन मैं आर्थिक दृष्टि से तरक्की कर रहा हूं । विकास कर रहा हूं । और आगे बढ़ रहा हूं । इन कथनों से मन में कोई भी संघर्ष उत्पन्न नहीं होता है ।
लेखक कहते हैं कि लक्ष्य को स्वीकार करने से लक्ष्य की प्राप्ति के साधन अपने आप आ जाते हैं । अगर हम यकीन करें कि मनचाही चीज इसी समय हमारे पास है तो हम इसे पा लेते हैं ।
अमीरी के राज मार्ग पर चलने के लिए आपको दूसरों की राह में रोड़े या बाधाएं नहीं रखनी चाहिए ना ही दूसरों के प्रति ईर्ष्या या दाह रखनी चाहिए । दरअसल इन नकारात्मक भावों को प्रश्रय देखकर आप खुद को ही चोट और नुकसान पहुंचा रहे हैं । क्योंकि आप ही तो हैं जो इसे सोच रहे हैं , महसूस कर रहे हैं और जैसा आप महसूस करते हैं वही आपके साथ हो जाता है । यह एक ब्रह्मांडीय और दैवी नियम है ।
यह एक महान नियम है कि जैसा आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में सोचे उनके बारे में भी वैसा ही आपको सोचना चाहिए । जैसा आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में महसूस करें उनके बारे में आपको भी वैसा ही महसूस करना चाहिए ।
पूरी शिद्दत से अपने आप से कहिए :मैं इस पृथ्वी पर चलने वाले हर इंसान के लिए जो चाहता हूं वही मैं खुद के लिए भी चाहता हूं । मेरे दिल की सच्ची इच्छा यह है कि हर जगह सभी लोगों को शांति ,प्रेम ,खुशी ,समृद्धि और ईश्वर का वरदान मिले । सभी लोगों की प्रगति ,तरक्की और समृद्धि में आनंदित और खुश हो ।
जो भी आप अपने लिए सच करना चाहते हो उसे हर जगह सभी लोगों के लिए सही माने । अगर आप खुशी और मानसिक शांति के लिए प्रार्थना करते हैं तो सभी के लिए शांति और खुशी का दावा करें । किसी दूसरे को कभी किसी खुशी से वंचित करने की कोशिश ना करें अगर आप ऐसा करते हैं तो आप खुद को वंचित करते हैं ।
यदि आपकी कंपनी में किसी की तरक्की होती है तो आनंदित और खुश होइये । उसे बधाई दीजिए । उसकी तरक्की और प्रतिष्ठा पर प्रसन्न होइये । अगर आप क्रोधित या विषाद पूर्ण है तो आप खुद को नीचे धकेल रहे हैं ।
अपने मकान कारोबार और संपत्तियों को बढ़ाने के लिए इस प्रार्थना का आप हर दिन इस्तेमाल करिए: जो सर्वोच्च शक्ति ग्रहों की कक्षा में उनका मार्गदर्शन करती है और जिसकी बदौलत सूरज चमकता है वह मेरी सारी संपत्ति , घर , कारोबार और मेरी सारी चीजों पर निगाह रखती है । ईश्वर ही मेरा किला और तिजोरी है । मेरी सारी संपत्तियां ईश्वर में सुरक्षित हैं ।
हर दिन खुद को इस महान सच्चाई की याद दिलाईये और प्रेम के नियमों पर चलिए तो आपको सभी तरीकों से मार्गदर्शन मिलेगा । आपका ध्यान रखा जाएगा और आपको समृद्ध बनाया जाएगा ।आपको कभी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा क्योंकि आपने सर्वशक्तिमान को अपना सलाहकार और मार्गदर्शक बनाया है ।
हम सभी को अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए अंदरूनी मार्गदर्शन लेना चाहिए ।
यदि आपके पास कोई आर्थिक समस्या है तो रात को सोने से पहले यह दोहराइये : अब मैं चैन से सोऊंगा मैंने यह मामला अपने अंदर की ईश्वरीय बुद्धिमता के हवाले कर दिया है । यह जवाब जानती है । जब सुबह सूरज उगेगा तो मेरा जवाब भी सामने आ जाएगा ।
मैं जानता हूं कि सूरज का उगना कभी नहीं रुकता है । फिर सोने चले जाइए । किसी समस्या पर परेशान मत होइए । चिंता मत करिए । आवेश में मत आइए । रात की नींद से सही सलाह मिलती है । समस्या पर सो जाइए । उस रोशनी के लिए प्रार्थना करिए जो आने वाली है । याद रखिए कि वह हमेशा आती है । छाया दूर चली जाती है । हर रात की नींद को एक संतुष्टि भरा आनंद बनने दें ।
आप जो भी बनने की हसरत रखते हैं जब आप उससे पूरी तरह भरे होते हैं तो आपकी प्रार्थना का जवाब मिल जाता है यानी आपकी इच्छा पूरी हो जाती है ।
अपने मन में समृद्ध जीवन को स्वीकार करिए । दौलत की आपकी मानसिक स्वीकृति और अपेक्षा का अपना खुद का गणित होता है । इसकी अभिव्यक्ति की अपनी खुद की कार्यप्रणाली होती है ।
जब आप समृद्धि की मनोदशा में दाखिल होते हैं तो समृद्ध जीवन जीने के लिए आवश्यक सारी चीजें घटित होने लगती है ।
इसे आप अपनी दैनिक प्रार्थना बना लीजिए । अपने दिल पर लिख लीजिए :ईश्वर मेरी समस्त आपूर्ति का स्रोत है । उसकी दौलत अब मेरी दौलत है । उसकी अमीरी मेरे पास खुलकर बहुतायत में और प्रचुरता में प्रवाहित हो रही है । मैं हमेशा अपने सच्चे मूल्य के बारे में चेतन हूं । मैं अपने गुणों का उपयोग मुक्तता से करता हूं और मुझे अद्भुत रूप से देवी मुआवजा मिलता है । हे परमपिता आपको धन्यवाद ।
अध्याय दो : अमीरी की राह!
इस अध्याय में लेखक हमें बताते हैं कि अमीरी हमारे दिमाग से जुड़ी होती है । उदाहरण के लिए हम मान लेते हैं कि किसी डॉक्टर का डिग्री चोरी हो जाता है । उसके ऑफिस की सारी मशीनें भी चोरी हो जाती है । लेकिन फिर भी उसके दिमाग में जो ज्ञान है वह चोरी नहीं हो सकता ।
वह अभी भी अपना काम कर सकता है । रोगों का उपचार कर सकता है । दवाएं लिख सकता है । ऑपरेशन कर सकता है । और चिकित्सा विज्ञान संबंधी व्याख्यान दे सकता है । उसकी अमीरी उसकी मानसिक क्षमता में है । दूसरों की मदद करने वाले उसके ज्ञान में है । और मानवता को योगदान देने की उसकी काबिलियत में है ।
जब आपके मन में मानवता के हित में योगदान देने की प्रबल इच्छा होती है तो आप हमेशा दौलतमंद होते हैं । सेवा यानी संसार को अपने गुणों से लाभ पहुंचाने की आप की आकांक्षा पर सृष्टि हमेशा प्रतिक्रिया करती है ।
आपके बाहरी जगत , शरीर , परिस्थितियां , परिवेश और आर्थिक प्रतिष्ठा हमेशा आपके आंतरिक सोच , विश्वासों , भावनाओं और मान्यताओं का पूर्ण प्रतिबिंब होता है । यह सच है इसलिए अब आप सफलता , दौलत और मानसिक शांति के विचारों पर मनन करके अपने आंतरिक वैचारिक नक्शे को बदल सकते हैं ।
जब आप अपने मस्तिष्क को इन बाद वाली अवधारणाओं से भरा रखते हैं तो यह विचार आपकी मानसिकता में धीरे-धीरे उसी तरह रीश जाती है जिस तरह जमीन में बोए गए बीज । सभी बीज अपनी तरह के फसल देते हैं । इसलिए आपकी आदतन सोच और भावना भी समृद्धि , सफलता तथा मानसिक शांति में प्रकट होगी । समझदार विचार के बाद ही सही कार्य होता है ।
सच्ची प्रार्थना हमें अपने मानसिक संघर्षों को सुलझाने में मदद करता है । प्रार्थना में हम वह लिखते हैं जिस पर हम अपने मन में विश्वास करते हैं । इमर्शन ने कहा था मनुष्य वह है जो वह दिन भर सोचता है । अपनी आदतन सोच के जरिए आप विश्वासों के अपने मानसिक नियम बनाते हैं । किसी निश्चित विचार को दोहरा कर आप निश्चित राय और विश्वास ज्यादा गहरे मन में स्थापित कर लेते हैं जिसे अवचेतन मन कहा जाता है । इसके बाद यह मानसिक स्वीकृति या विश्वास और राय सारे बाहरी कार्यों को निर्देशित व नियंत्रित करती है ।
हमारे मन के नियम यह कहते हैं कि जैसा हम अंदर से सोचते हैं और महसूस करते हैं वैसा ही हमारे बाहर जगत में प्रकट हो जाता है । यानी हमारा शरीर, आर्थिक स्थिति, परिवेश, सामाजिक स्थिति और संसार के मनुष्यों के साथ हमारे संबंध । हमारी आंतरिक मानसिक गतिविधियां और चित्र हमारे जीवन के बाहरी धरातल को शासित करती है , नियंत्रित करती है और दिशा देती है ।
विचार और भावना हमारी तकदीर है :भावना और रुचि से सरोबार विचार हमेशा साकार होता है और हमारे संसार में प्रकट हो जाता है ।
मन का कोई भी विचार या इच्छा जिसे सच में महसूस किया जाए घटित हो जाती है । चाहे वह अच्छी हो या बुरी हो या तटस्थ हो । जब हम इस नियम को जान लेते हैं तो हम अपने मन में जिसकी भी कल्पना करते हैं और महसूस करते हैं उसे हम अपने जीवन में व्यक्त कर लेते हैं । प्रकट कर लेते हैं ।अनुभव कर लेते हैं । इस ज्ञान की बदौलत हम अपने मन को अनुशासित कर सकते हैं ।
लेखक हमें प्रार्थना के बारे में बताते हैं कि प्रार्थना में हमें इंद्रियों के प्रमाणों और बाहरी जगत से पूरी तरह विरक्त हो जाना चाहिए । हमें अपने मन को झूठे विश्वास, डर, शंका और चिंता से साफ कर लेना चाहिए । अपने मन के पहियों को रोक देना चाहिए ।
फिर शांत मन से सफल प्रार्थना की खुशी पर तब तक मनन करना चाहिए जब तक की आंतरिक निश्चितता ना आ जाए । यानी जब तक की यह हम ना जान जाए कि हम जान गए हैं । जब हम अपनी इच्छा के साथ एक होने में सफल हो जाते हैं तो हमारा मानसिक विवाह सफल हो जाता है यानी हमारी भावनाओं का हमारे विचार के साथ संयोग हो जाता है ।
प्रार्थना की प्रक्रिया में हमें हमेशा अपने लक्ष्य , उद्देश्य और ध्येय के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए । कई लोग दौलत और आर्थिक सफलता हासिल करने में इसलिए असफल रहते हैं क्योंकि वह दो तरफा प्रार्थना करते हैं । वह कहते हैं कि ईश्वर उनकी आपूर्ति का स्रोत है और वह देवी रूप से समृद्ध है लेकिन कुछ मिनट बाद ही यह कह कर अपनी भलाई से इनकार करते हैं मैं इस बिल का भुगतान नहीं कर सकता ।
मैं इस या उस चीज का खर्च नहीं उठा सकता । मैं महीने का खर्च नहीं चला सकता । मेरे पास गुजारा करने के लिए कभी पर्याप्त नहीं रहता है । ऐसे सारे कथन बेहद विनाशकारी है । और आपकी सकारात्मक प्रार्थनाएं को विफल कर देते हैं । इसे ही दो तरफा प्रार्थना करना कहा जाता है ।
आपको अपनी योजना या अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए । आपको आध्यात्मिक शक्ति के अपने ज्ञान के प्रति सच्चा रहना चाहिए । आपको नकारात्मक विचारों , डरो और चिंताओं के साथ संयुक्त होना बंद कर देना चाहिए । आपकी प्रार्थना सफल होगी ।
प्रार्थना उस कप्तान की तरह है जो अपने जहाज को दिशा का निर्देश दे रहा है । आपके पास एक मंजिल होनी चाहिए । आपको पता होना चाहिए कि आप कहां जा रहे हैं । जहाज का कप्तान परिवहन के नियमों को जानते हुए अपनी दिशा को नियंत्रित करता है । अगर तूफान या बड़ी लहरों के कारण जहाज दिशा से भटकता है तो वह शांति से इसे दोबारा इसकी सच्ची दिशा की ओर मोड़ लेता है ।
आप अपने जहाज के कप्तान हैं । और आप अपने विचारों, भावनाओं , विश्वासों और मनोदशा के जरिए आदेश दे रहे हैं । प्रकाश रेखा पर अपनी निगाहें रखिए । आप वहीं जाते हैं जहां आपकी दृष्टि होती है । इसलिए उन सारी बाधाओं , विलंब और अवरोधों को देखना छोड़ दीजिए जिनकी वजह से आप अपनी दिशा भटक सकते हैं । निश्चित और सकारात्मक रहे ।
तय करें कि आप कहां जा रहे हैं । जान लें कि आपका मानसिक नजरिया ही वह जहाज है जो आपको अभाव तथा सीमा की मनोदशा से समृद्धि की मनोदशा और भावना तथा इस विश्वास तक ले जाएगा कि ईश्वर का अपरिहार्य नियम आपके लिए काम कर रहा है ।
मनुष्य की आंतरिक मनोदशा और विश्वास हमेशा उसके बाहरी संसार को नियंत्रित और शासित करते हैं । मन की आंतरिक गतिविधियां बाहरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है । बाहर बदलने के लिए आपको भीतर बदलना होगा ।
आप प्रार्थना के जरिए किसी भी स्थिति को उलट सकते हैं । अपने मन को शांति , सफलता , दौलत और खुशी की अवधारणाओं में व्यस्त रखिए । मानसिक , भावनात्मक और चित्रात्मक रूप से इन विचारों के साथ जुड़ाव बनाइए ।
अपनी वैसी तस्वीर बनाईए जैसा कि आप बनना चाहते हैं । उस तस्वीर को कायम रखिए । खुशी , आस्था और अपेक्षा से उसे पोषण दीजिए । आखिरकार आप इसका अनुभव करने में सफल होंगे ।
जीवन में अपने लक्ष्य के साथ जुड़ाव बनाइए और आलोचना और निंदा , क्रोध , डर और चिंता के साथ जीना बंद कर दीजिए । अपने चुने हुए लक्ष्य पर ध्यान दीजिए । समृद्धि और सफलता के अवश्यंभावी नियम में विश्वास और आस्था से सरोवार रहिए ।
1 मिनट तक अपने लक्ष्य से प्रेम करके और अगले ही मिनट उससे इनकार करके आपको कुछ हासिल नहीं होगा । यह तो अम्ल और छार को मिलाने जैसा है जिससे आपको एक उदासीन तत्व ही मिलेगा । अमीरी की राज्य मार्ग पर चलने के लिए आपको अपने चुने हुए लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से निष्ठावान रहना होगा ।
चुनाव करने की अपनी क्षमता के जरिए हम उस हकीकत की कल्पना कर सकते हैं जिसे हम अपने लिए चुनते हैं । आस्था व लगन के जरिए हम जीवन में अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं । स्वर्ग की सारी दौलत यहीं पर हमारे भीतर है । और मुक्त होने का इंतजार कर रही है । शांति , खुशी , प्रेम , मार्गदर्शन , प्रेरणा , सद्भाव और समृद्धि सभी इसी समय मौजूद है ।
ईश्वर की दौलत को अभिव्यक्त करने के लिए हमें बस इतना करना है कि अभी के वर्तमान को छोड़कर मानसिक तस्वीर में दाखिल हो जाए और एक सुखद , खुशनुमा मनोदशा में अपने लक्ष्य के साथ एक हो जाए । उल्लास के पलों में अपनी अच्छाई को देखने और महसूस करने के बाद हम यह जान जाते हैं कि कुछ ही समय में अपने लक्ष्य को वस्तु परक तरीके से भी साकार होते देखेंगे ।
जैसा भीतर होता है वैसा ही बाहर आ जाता है । जैसा ऊपर होता है वैसा ही नीचे होता है । जैसा स्वर्ग में वैसा धरती में । दूसरे शब्दों में हम अपने विश्वास को अभिव्यक्त होते देखेंगे ।
इस प्रकार लेखक हमें इस अध्याय में प्रार्थना की शक्ति , हमारे मन की शक्ति , हमारे कल्पना शक्ति , हमारे लक्ष्य के प्रति समर्पण और हमारे विचारों की शक्ति के माध्यम से जीवन में समृद्धि और अमीर होने की राह बताते हैं ।
दोस्तों यह थी Book “How to attract Money” की summary in hindi यह समरी आपको कैसी लगी कृपया हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं । अगर आपको यह समरी अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों और फैमिली मेंबर्स के साथ अवश्य शेयर करें ।
आपको यह बुक समरी अच्छी लगी हो और आप इस किताब को और डिटेल से पढ़ना चाहते हैं तो आप नीचे दिए गए किताब के कवर पर क्लिक करके इस किताब को खरीद सकते हैं ।
Thank you !
HOW TO ATTRACT MONEY BY JOSEPH MURPHY AUDIOBOOK SUMMARY IN HINDI…
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